साहित्यिकों का मन वृंदावन चाहिए।
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
साहित्य में भावों का संचार चाहिए।
साहित्य में भाषा का श्रृंगार चाहिए।
आकर्षक हो साहित्य हिन्दी भाषा का,
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
हिन्दी साहित्य में सुंदर बहार चाहिए।
भावनाओं के सम्प्रेषण में धार चाहिए।
मनोरम हो साहित्य हिन्दी भाषा का,
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
साहित्य में रसों का संचार चाहिए।
कल्पनाओं में ऊंची उड़ान चाहिए।
ध्यान हो साहित्य में विशुद्धता का,
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
साहित्य समाज का दर्पण चाहिए।
जीवन- पथ का मार्गदर्शन चाहिए।
उद्देश्य हों नयी पीढ़ी के निर्माण का,
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
साहित्य को संस्कृति का अधिष्ठान चाहिए।
साहित्य को सनातन का अधिष्ठान चाहिए।
उद्देश्य हो समाज को संस्कारित करने का,
हिन्दी भाषा को वैश्विक सम्मान चाहिए।।
-ओ सी पटले