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भूख....

Himanshu Priyadarshi

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                            भूख
        
                                                    
                            

भूख भी अजीब होती है

गरीब दो जून की रोटी की भूख के लिए तड़पता है
और अमीर तड़पता है दौलत की भूख के लिए
बेशुमार दौलत अमीर को सोने नहीं देती लेकिन उसकी भूख फिर भी बढ़ती है और दौलत के लिए
गरीब मुफ़लिसी की चादर तान चैन से सोता है क्योंकि उसके पास कुछ नहीं होता है

लड़के वाला दहेज की भूख में रोता है और
रुलाता है नई कली सी नवविवाहिता को उसके परिवार को कुंठा के गड्ढा में ढकेलते हुए
बिना ये समझे के वो भी बनेगा ग्रास किसी और की भूख के लिए
लड़की वाला भूखा होता है पैसे वाले परिवार के लिए बिना ये सोचे कि वो नासमझ दौलत का भूखा सम्पन्न परिवार तबाह कर सकता है उसकी बेटी का जीवन और खुद उसको जिंदगी भर के लिए

हिन्दू भूखा है हिंदुत्व की सुरक्षा के लिए और
मुसलमां भूखा है इस्लाम की पहरेदारी के लिए
मगर रक्षा तो किसी की न हो पा रही पर
प्रतिपल इंसानियत ख़ाकसार होती जा रही है इन "धार्मिकों" की धर्मरक्षा के अघोषित पर निरन्तर युद्ध की भूख के लिए

आजकल इंसां की मानवता को बचाये रखने और सहेजने की भूख मर चुकी है धर्म की श्रेष्ठता बांचने के लिए
न जाने अब कौन जलायेगा अधमरी मानवता की कब्र पर सौहाद्र और सद्भाव के मरहम-पट्टी की भूख के चिरकालिक दिए

नारी प्रेम की भूखी होती है लेकिन
मर्द भूखा होता है उसके जिस्म के लिए

पाकिस्तान भूखा है कश्मीर के लिए
जबकि आवाम खुद भूखी है पाकिस्तान की बेहतरी के लिए

पर चीन भी भूखा है डोकलाम की जमीन के लिए
और भूखा है बिना नैतिकता और मानवीयता की परवाह किये अपनी विस्तारवादी नीति के लिए

अमेरिका भूखा है विश्व में विश्वशक्ति बनने के लिए
इसलिए उसने कितने ही देशों और सभ्यता को नष्ट किया अपनी भूख को संतुष्ट करने के लिए


भूखे तो लोग भी हैं बगैर अपने गिरेबां में झांके झूठे आत्मसम्मान के लिए

प्रकृति भूखी है तमाम जिंदगियों को अपने आगोश में समेट लेने के लिए क्योंकि
मनुष्य ने ही तो छेड़ा है कुदरत को निरन्तर अपनी अपार असन्तुष्ट भूख के लिए

आसाम त्रस्त है बाढ़ से और लगभग पूरा उत्तर भारत मगर
गरीब आम आदमी उन प्राकृतिक आपदाओं से जूझने में मशगूल है बग़ैर सरकारी मदद के अपनी जिंदगी के भूख के लिए

भूखे तो हम(युवा) भी हैं रोजगार के लिए
हम भारत हैं, निरन्तर तमाम मुसीबतों और आपदाओं से त्रस्त भारत लेकिन
उन मुसीबतों और आफ़तों से जूझते और जीतते भारत अपनी सभी तरह की भूख के लिए

और ये सब निरन्तर जारी है इसलिये क्योंकि
सत्तानशीं भयंकरता से भूखे हैं असीमित शक्ति और राजसत्ता के लिए
क्योंकि हिटलर है उन सफेदपोशों का आदर्श जिसे नहीं था अफ़सोस भी मानवता के दमन के लिए

अजीब है वास्तव में भूख
जो बर्बाद, तबाह और निस्तेनाबूत कर देगी मनुष्यता और सुंदर प्रेम की भूखी दुनिया को क्योंकि
भूख निरन्तर भूखी है भूख के लिए..............

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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