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बेपरवाह

HIMANSHI SINGH

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी की मोहब्बत में भी तुम क्या कुर्बान हो सकोगे
        
                                                    
                            
जब अपने का लाड़ ना समझा
मोहबत को आँसू बहाते रहे कभी माँ बाप का प्यार ना समझा
कैसे इंसान हुए तुम एक झूठे के लिए मर गए
तेरा झूठा खाने वाले का प्यार ना समझा
वो तेरे लिए सूखी ज़मीन पे बारिश सा बरस गया
तू फिर भी उसका उपकार ना समझा

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6 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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