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अनकहा प्रेम

HEMANT KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँखों में उतरा,
        
                                                    
                            
होंठो पर आकर ठहर गया।
थोड़ा ढला स्याही में
बहुत गुमनाम रहा।
जिया गया खामोशी से,
न जाने कितना प्रेम,
अनकहा प्रेम।
2 दिन पहले
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