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अनकहा प्रेम

                
                                                         
                            आँखों में उतरा,
                                                                 
                            
होंठो पर आकर ठहर गया।
थोड़ा ढला स्याही में
बहुत गुमनाम रहा।
जिया गया खामोशी से,
न जाने कितना प्रेम,
अनकहा प्रेम।
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एक दिन पहले

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