विज्ञापन

जो आज तक दिल में छुपा रखा है।

Heena Yerne

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या कहें… किससे कहें… और कैसे कहें?
        
                                                    
                            

जब से जुदा हुए हैं,
याद बहुत आती है…

आँखों में ये पानी क्यों है,
ये भी किसी को बता नहीं सकते।
बस इतना जानते हैं…
याद बहुत आती है।

भूलने की कोशिश करते हैं हर पल,
पर क्या करें…
दिमाग तो मान जाता है,
लेकिन दिल आज भी नहीं मानता।

कभी-कभी बस एक सवाल दिल में उठता है—
क्या जितना मैं तुम्हें याद करती हूँ,
उतना तुम भी मुझे याद करते हो?

शायद जिम्मेदारियाँ इतनी होंगी,
कि याद करने का वक्त भी नहीं मिलता होगा…
समझ सकती हूँ।

राधा का ज़िक्र भी कहाँ होता है,
जब रुक्मिणी साथ हो…

बस एक तमन्ना है—
एक बार तुमसे मुलाकात हो जाए।

देखना है…
तुम वैसे ही हो या बदल गए हो,
जैसे मैं आज भी तुम्हें अपनी यादों में देखती हूँ।

और फिर मन खुद से पूछता है—
कैसे होंगे वो पल…
जब रुक्मिणी तुम्हारे साथ होगी,
और मैं तुम्हारे सामने?

शायद कुछ कह नहीं पाऊँगी…
बस तुम्हें देखूँगी,
और आँखें वो सब कह देंगी
जो आज तक दिल में छुपा रखा है।

 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile