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काल से बना महाकाल हूँ मैं

Heena Mistry

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काल से बना महाकाल हुं मैं
        
                                                    
                            
हर रूप से विक्राल हुं मैं

रंग से बेरंग हुं मैं
मन भोले संग हुं मैं

नीलकंठ विष से हुं मैं
हर अंत में समा शेष हुं मैं

सती का प्राण धरी शव हुं मैं
पार्वती का शिव हुं मैं

न आदी न अंत हुं अनंत मै
नाम से जो ले धनंत हुं मैं

वर दे वो अपार ब्रह्म हुं मैं
देव नाहीं मै तेरा ये तुझ्मे भ्रम हुं मैं

नाथ में एक नाथ हुं मैं
भोले मन का दीनानाथ हुं मैं

नश्वर हुं मैं
ईश्वर हुं मैं

किंचित नहीं पर निश्चित हुं
रहे तू हर पल निश्चिंत जो हुं मैं
बस तेरे पाप का प्रायश्चित हुं मैं

 
एक महीने पहले
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