एक दोस्त चाहिए जो हो कुछ दोस्त से ज्यादा
जो बांट ले सुखों को मेरे गम को भी आधा
यूँ तो मेरे मरने पे हाँ, रोयेंगे बहुत लोग
कोई तो हो रोने पे जो मरने को आमादा
– हरवंश श्रीवास्तव ‘हृदय’
(बाँदा)