गुरु जैसा मित्र कहाँ कोई और,
हरदम साथ निभाते चाहे कैसी भी हो भोर।
पाप से छुड़ाकर सत्कार्य में जो लगाये,
वेद-शास्त्रों में वही सच्चा मित्र कहलाये।
कल्याण के मार्ग आप सदा बढ़ाते,
थामकर हाथ आप ही तो मोक्ष-राह दिखाते।
नहीं आप जैसा कोई मेरा सच्चा मित्र,
जो अंतर्मन से जानते हैं मेरा चरित्र।
ज़रा-सी बात पर करना थोड़ा गौर...
...
दोषों को मिटाने की संजीवनी आप देते,
हार भी जाऊँ तो मुझे हौसला दिलाते।
कलम थी हाथ में, लिखना आपने सिखाया,
दलदल के इस संसार से आपने ही तो बचाया।
जगत की राह तो हर कोई दिखाता,
जीवते बना सकूँ ऐसी राह गुरु ही बताता।
जन्मों-जन्मों तक रहे अपनी यह फ्रेंडशिप,
फ्रेंडशिप डे आये या न आये, आबाद रहे फ्रेंडशिप।
'हर्षित' तोड़े कोई कितना भी, नहीं टूटेगी यह डोर...