आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फ्रेंडशिप डे

                
                                                         
                            गुरु जैसा मित्र कहाँ कोई और,
                                                                 
                            
हरदम साथ निभाते चाहे कैसी भी हो भोर।
पाप से छुड़ाकर सत्कार्य में जो लगाये,
वेद-शास्त्रों में वही सच्चा मित्र कहलाये।
कल्याण के मार्ग आप सदा बढ़ाते,
थामकर हाथ आप ही तो मोक्ष-राह दिखाते।
नहीं आप जैसा कोई मेरा सच्चा मित्र,
जो अंतर्मन से जानते हैं मेरा चरित्र।
ज़रा-सी बात पर करना थोड़ा गौर...
...
दोषों को मिटाने की संजीवनी आप देते,
हार भी जाऊँ तो मुझे हौसला दिलाते।
कलम थी हाथ में, लिखना आपने सिखाया,
दलदल के इस संसार से आपने ही तो बचाया।
जगत की राह तो हर कोई दिखाता,
जीवते बना सकूँ ऐसी राह गुरु ही बताता।
जन्मों-जन्मों तक रहे अपनी यह फ्रेंडशिप,
फ्रेंडशिप डे आये या न आये, आबाद रहे फ्रेंडशिप।
'हर्षित' तोड़े कोई कितना भी, नहीं टूटेगी यह डोर...
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर