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सफ़रनामा हम आज एक सफ़र को लिखते हैं...

HARSHIT KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सफ़रनामा आज एक सफ़र को लिखते हैं,
        
                                                    
                            
चलो कहीं दूर तक चलते हैं,
जब तक कदम न थकें तब तक चलते रहते हैं,
सफ़रनामा आज एक सफ़र को लिखते हैं...

जब तक चाँद ज़मीं को न छू ले,
आसमान का अंतिम छोर न छू लें तब तक,
न रुकते हैं, हम आज उन दूरियों को छू लेते हैं, जो अब तक थीं केवल एक कल्पना,
थोड़ा-सा इंतज़ार करते हैं, साथी न मिले तो अकेले चलते हैं, अनंत को आज तलाश लेते हैं,

सफ़रनामा आज एक सफ़र को लिखते हैं,
खुद से दो-चार बातें करते हैं,
बाँहें फैलाए हर तकलीफ़ को छोड़ के खुद को खुद में समेट लेते हैं,
खुद ही खुद के हमसफ़र बनते हैं,
सफ़रनामा हम आज एक सफ़र को लिखते हैं...
55 मिनट पहले
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