हल्दी और चंदन का पवित्र टीका,
धागों से बँधा स्नेह का पावन बंधन।
भैया की सूनी कलाई सजाकर,
विश्वास का एक दीप जलाकर,
करती हैं जो हर दुख का हरण,
उस निश्छल प्रेम को शत-शत नमन॥
संसार के हर रिश्ते में यह प्यार सजे,
खुशियों से महके हर घर का आँगन।
दुख की धूप में जो दे ठंडी छाया,
बहना का प्यार है स्नेह का सावन॥
- तीरथ प्रसाद गुप्ता