माँ - मेरी कायनात
हर इबादत में जिसकी पनाह मिलती है,
माँ के कदमों में जन्नत की राह मिलती है।
ज़माने भर की हर एक ख़ुशी फीकी पड़ जाए,
माँ की एक मुस्कान में जब कायनात मिलती है।
उदासीयों के बादल पल भर में छट जाते हैं,
उसकी लोरी में जब भी सुकून की चाह मिलती है।
– तीरथ प्रसाद गुप्ता