गांव के खेतों में सरसों के फूल थे
आस पास में ही कई स्कूल थे
गांव के लड़के लड़कियां अपनी सुविधानुसार
भिन्न भिन्न स्कूलों में पढ़ने जाते थे
रास्ते मिट्टी के थे , धूल उड़ती हुई दिखाई देती थी
उनके चेहरे पर जमती हुई दिखाई देती थी
सरसों के खेतों से वह रास्ता गुजरता था
बच्चे फूलों को तोड़ कर खुद को सजा रहे थे
उनके किरदार प्रकृति के आंगन में सजीव लग रहे थे
उन फूलों की मुस्कान बच्चों की मुस्कान थी ।
हरिकेश यादव बी एच यू
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