मैं एक लड़की हूं
मेरा जिस्म ही मेरा गुनहगार है
बताऊं कैसे ?
मेरा जब इस धरा पर नग्न आगमन हुआ
मतलब मैं पैदा हुई
तो कुछ ने मेरा स्वांग पूर्ण स्वागत किया
तो कुछ ने मुझे घर की लक्ष्मी कहा
तो कुछ ने मुझे लड़की कहा
तो कुछ ने बोझ कहा
और कुछ ने मुझे भविष्य में अपनी हवस का शिकार
।
लड़की कहकर लोगों ने लिंग भेद किया
लक्ष्मी कहकर लोगों ने धर्म भेद किया
बोझ कहकर लोगों ने कर्म भेद किया
हवस का शिकार कहकर लोगों ने प्रेम भेद किया
आखिर क्यों?
जब मैं अपने घुटनों के बल चलने लायक हुई
तो शुरू हुआ प्रेम का प्रपंच
किसीने मेरे होठों को चूमा
किसीने मेरे बदन को सहलाया
किसीने मेरे मन को बहलाया
किसी ने मेरे कपोलों को कसके काटा
किसीने मारा कसके चाटा ।
मैं पांच वर्ष की हो गई
फिर शुरु हुआ
शुरु हुआ शिक्षा का सफर
मैं पांचवीं उत्तीर्ण हो गई
धीरे धीरे नवीं में पहुंच गई
और फिर शुरु हुआ
शुरु हुआ हवस और प्यार का नाटकीय घटनाक्रम
मेरी कक्षा के छात्र अपने अपने प्यार का दावा करने लगे
कोई कहता वो मेरी है और कोई कहता मेरी
और तो और शिक्षक अलग से प्यार का नाटक करते
यही क्रम चलता रहा
रिश्तेदार और गांव वाले अलग से प्यार का नाटक
करते
।
फिर नौकरी करने लगी वहां भी यही प्यार का नाटक
फिर शादी हुई
वहां भी पति के भाई और दोस्त अपने अपने तरीके से प्यार का नाटक करते ।
सब मेरे जिस्म के भूखे हैं
क्योंकि मैं एक लड़की हूं
मेरा बदन ही मेरा गुनहगार है ।
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