शौक था उसको पढ़ने का अंग्रेज़ी
ख़ैर क्या था इसमें हर्ज ही
सागर थी वो
कस्ती था मैं कागज़ का
डूबता ही चला गया
तूफान ऐसा आया कि साहिल ही न मिला
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।