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अंतर्मन की देहरी पर

Hari Shankar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया की दिशाहीन गति में
        
                                                    
                            
मन जब थकने लगे
विचारों की उलझन में
दिल की धड़कन ही छलने लगे
लौट आना तब अंतर्मन की देहरी पर
10 घंटे पहले
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