कब तक बचूंगा मैं अपने बीते अतीत से
जो बोया हूं आखिर उसे काटना तो पड़ेगा ही
गर शाखों को जिंदा रखना है सदियों के लिए
जो झुकीं डालें हैं उसे छांटना तो पड़ेगा ही
बिगड़ जाती हैं नस्लें यहां,जो पले दुलार में
बुरी सोहबतें छुड़ानी हैं तो डांटना तो पड़ेगा ही
नहीं सभंलता अकेले सुख-दुख का तूफान यहां
वजन हल्का करना है तो बांटना तो पड़ेगा ही
कुछ वक्त हमसे उधार लेकर अब मुकर रहे हैं वो
सफर में हैं वो कभी ना कभी सामना तो पड़ेगा ही
जब खून गर्म था तब पाल लिए हजारों दुश्मन
नब्ज़ थमने लगीं है अब उनसे भागना तो पड़ेगा ही
उसूलों पर हमारें वो चोट पर चोट करते रहें
टकराना है अब,दहलीज़ आखिर लांघना तो पड़ेगा ही
सपनें हर कोई देखता है चकाचौंध की चांदनी मे
इन्हें अगर पूरा करना है तो जागना तो पड़ेगा ही
तभी नचाते है वो,शायद वक्त मेरा उनकी मुठ्ठी में कैद है
राहुल"धीरज" से काम लो,कुछ दिन नाचना तो पड़ेगा ही
राहुल वर्मा
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