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टकराता चल

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                            सीमा
        
                                                    
                            
का भूगोल
न बिगड़े
बना चमन
फिर से ना
उजड़े ,
वर्दी की
लाज
बचाता चल
टकराता
चल
टकराता चल
घर की
याद
सताएगी
मां की
याद भी आएगी
पर
अपना फर्ज
निभाता चल
टकराता चल
टकराता चल
स्याह न हो
कश्मीर
की घाटी
प्यारे
मेरे देश की माटी
मां का
दूध
बचाता चल
टकराता चल
टकराता चल
सीमा
पर ही
डटे रहोगे
माइनस में ही
खड़े रहोगे
आतंक
वाद के अड्डे पर
रह-रह
बम बरसाता चल
टकराता चल
टकराता चल
नहीं
डरे गलवान में
हम सब
नहीं डरे
डोकलाम में हम सब
भारत
मां की जय बोलो
बूटों से
धूल उड़ाता चल
टकराता चल
टकराता चल
-हंस नाथ यादव
 
एक वर्ष पहले
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