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अब फ्री हैंड हूं

Hans Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समस्याओं
        
                                                    
                            
को साहित्यिक
वीथिका में
स्थान नहीं
दिया
न टूटे गद्य में।
रस से
लबालब था
एक दिन शरारत
सूझी
समस्याओं की
एक सूची
बना डाला
ढेर सारे पेपर
जोड़ते - जोड़ते
लिस्ट लम्बी
हो गई
उसे संभाल
कर रखना
भी एक समस्या
हो गई।
सहसा एक
उपाय सूझा
सारी समस्याओं
के पन्नों का
एक रोलिंग
चार्ट बना
डाला।
रोलिंगचार्ट
समस्याओं
का एक
प्रोजेक्ट था
उसे लपेट
कर
अपने ग्रंथालय
की खूंटी में
टाँग दिया।
समय बीतता
चला गया।
अचानक
मुझे ख्याल
आया
लगभग सत्तर
वर्ष बाद
मुझे खुशी भी
थी कि मै
अपनी समस्याओं
का अवलोकन
करूं।
चार्ट को
खूंटी से उतारा
तो हैरान रह
गया।
सारे पन्ने
तिलचट्टे खा
गए थे
कुछ कतरन उठाकर
देखा उसे
पढ नहीं पाया
एक ही बार
में मेरी सारी
समस्याएं चली गई
थी
अब फ्री हैंड हूँ।।
-हंस नाथ यादव
 
4 घंटे पहले
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