ज़रूरी नहीं प्रेम का सदैव मुखर होना,
कुछ ख़ामोशियाँ भी प्यार की ज़ुबान होती हैं...
प्यार भरी छुअन,
आंखों में बात करना,
बिन कहे जान लेना,
एहसासों का समझना,
अपने से पहले,
किसी का ध्यान रखना,
इक प्यारी सी मोहब्बत बिना जताए करना!