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क्षत-विक्षत घाव जब टीस भरते हैं

Gurjeet Kaur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्षत-विक्षत घाव जब टीस भरते हैं,
        
                                                    
                            
न मिलने वाले की आह भरते हैं!
जिंदगी के सफर में तन्हा हम,
उस अजनबी को रोकर याद करते हैं!
जो गर मिलता तो जिंदगी कुछ और होती,
छांव तो छांव,धूप भी धूप न होती!
मन पंछी बन सपनों के गाँव उड़ता,
दुख ग़म मुसीबत और न होती जड़ता!!
3 महीने पहले
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