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फिर खामोशी से अपने सफर पर निकल

Goutam suthar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो चला गया, उसे लौटकर आने की दुआ मत कीजिए,
        
                                                    
                            
कुछ किस्सो को अधुरा ही अच्छा रहने दीजिए।

हर मोड पर किसी का इंतजार जरूरी नहीं,
कभी अपने कदमो को भी मुस्कुराने दीजिए।

जो आँसू गिर चुके हैं उन्हें गिरना छोड दीजिए,
अब आँखो मे नए मौसम उतर आने दीजिए।

हर शख्स उम्र भर साथ निभा नहीं सकता,
कुछ लोगो को बस यादो तक ही रहने दीजिए।

दिल को हर बार इल्जाम देना भी ठीक नहीं,
कभी तकदीर को भी अपना फैसला करने दीजिए।

रंजिशों का बोझ बहुत भारी होता है
उन्हे वक्त की नदी मे बह जाने दीजिए।

जिंदगी किसी एक चेहरे की मोहताज नही,
हर सुबह को नए उजाले के साथ आने दीजिए।

और जो आपका होकर भी आपका न रहा,
उसे मोहब्बत का आखिरी सलाम कीजिए..

फिर खामोशी से अपने सफर पर निकल जाएइ
एक दिन पहले
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