कुछ न कह कर भी हर बात कहते हैं,
लफ्जों में बयां न हों मगर जज़्बात रहते हैं।
ये जिस्मों से मिलना ही सब कुछ नहीं होता यारों,
रूह से रूह के मिलन को जन्म-जन्मांतर की मुलाकात कहते हैं।
— डोभाल गिरीश