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इबादत-ए-इश्क़

Girish Chandra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब तो खुदा से रोज़ मुलाकात होती है,
        
                                                    
                            
शाम-ओ-सहर बस तेरी ही बात होती है।
तू चाहत, तू मोहब्बत, तू आदत, तू ही इबादत,
तुझ पर ही गुफ़्तगू सारी रात होती है।
— डोभाल गिरीश
6 महीने पहले
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