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माया की छाया

Girija Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कंचन, कामिनी और काया , ये तीनों हैं माया की छाया ।
        
                                                    
                            
कहै कबीर सुनहु धरमनि , छुटिहें जब मिलि गुरु की दया ।।
अपनी अपनी धुन में , बजाबे सब अपने साज-ओ-बाज ।
रहिमन लहरी प्रेम में , निकले एकहि सूर एकहि आवाज ।।
ऐहि जीवन जंजाल में , काल फेंके अपना जाल-ओ-पाशा ।
जो करे सुसंगति रहे सत्संग में , वही बचिहें कहे संत रैदासा ।।
इस स्वप्निल संसार में , जीव करता हाट-बाजार ।
पलटू संग 'गिरिजा' कहै , साधो आचार-विचार ।।
3 महीने पहले
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