विज्ञापन

सिगरेट का वो कस

GhumoIndia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सिगरेट का वो कस
        
                                                    
                            
जो मेरे होंठों को चूम के
आपके लबों तक गया
वो रेत बन मेरे ख्वाबों में बस गया
हम ढूंढते रहे दर-ब-दर आपके निशा
वो धुआँ का चिराग़ बन ख़्वाबों में मिल गया
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile