सिगरेट का वो कस
जो मेरे होंठों को चूम के
आपके लबों तक गया
वो रेत बन मेरे ख्वाबों में बस गया
हम ढूंढते रहे दर-ब-दर आपके निशा
वो धुआँ का चिराग़ बन ख़्वाबों में मिल गया
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