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कोरोना का कहर दिल वालों पर

Ghanshyam Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोरोना के पहले तुम भी क्या गजब ढाती थी।
        
                                                    
                            
सुबाह, दोपहर, श्याम नज़र आती थी।
दिन मैं अपनी चाहत की खुशबू बिखेरती थी
तो रात में ख्वाबों मैं अपनी प्यार की चांदनी।

परंतु कोरोना के बाद का ये आलम है
की, सामने तो तुम पूरी तरह आती हो।
पर तुम्हें देखने की हसरत
अधूरी रह जाती है।
जो बातें तुम होठों से कहती थी
वो बातें अब मास्क के कारण
नजरें कह जाती हैं।
और तुम्हें गले लगाने की हसरत
गज की दूरी से
दिल में ही रह जाती है।
हाथ में ग्लव्स, चेहरे पे मास्क
क्या माहौल कोरोना ने लाया हैं।
अरे, प्यार करने वालों ने,
कहीं तो हद पार की होगी,
तभी तो मुंह छुपाने का जमाना आया है।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

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