विज्ञापन

अपने या अपनों

Ghanshyam Bairagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब...
        
                                                    
                            
जवानी रहती है।
कब...
अपने-अपने में लगे रहते हैं॥
तब...
आगे की फिकर कहाँ...?
अब...
खड़े, बुढ़ापे के दहलीज पर !
तब...
अपने साथ छोड़ गये...?
जब...
अपनों की याद आती है॥
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all