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दो अलग दुनियाओं के मिलन'

Gauri Shankar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम चमक धमक हो बड़े शहर की, मैं अंधेरा गांव गली का।
        
                                                    
                            
तुम लगती हो स्वर्ग सुंदरी, मैं एक सन्यासी वन का।
तुम गुंजन करती कोयल सी, मैं लगता सरदार कांव का।।
तुम महकती हुई इत्र हो, मैं धुंआ हूँ पुराने इंजन का।
तुम गीत हो मीठी बंसी का, मैं शोर हूँ टूटे बर्तन का।
तुम नाज़ुक डाली नीम की, मैं तना हूँ बूढ़े पीपल का।
तुम खबर हो आज की ताज़ा, मैं पन्ना हूँ बीते कल का।
तुम मलमल वाले बिस्तर सी, मैं खुरदरा टाट हूँ बोरी का।
तुम चर्चा हो दिल्ली वाली, मैं किस्सा हूँ चोरी का।
तुम सावन की रिमझिम हो, मैं सूखा हूँ जीवन का।
तुम चमक धमक हो बड़े शहर की, मैं अंधेरा गांव गली का।।
7 महीने पहले
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kamlesh ranjan

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