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गुमान

Gauri Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम उनके इश्क के गुमान में
        
                                                    
                            
कुछ यूं इस कदर टेढ़े थे
की मानने लगे थे कि ,
सनम वह मेरे थे......

आंख खुली तो हकीकत से
रू-ब-रू हुए
जिन्हें फूलों का समझा था
वह कांटों के बसेरे थे
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे .....

ख्वाबों की रंगीन दुनिया में
जी रहे थे हम
किस्मत में मेरी तो रात थी
किसी और के सवेरे थे
की मानने लगे थे सनम वह मेरे थे .....

दिल में कुछ और
जुबान पर कुछ और होता है
कहने को सब अपने हैं
फिर क्यों हम अकेले थे
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे ....

तेरे इश्क की रोशनी में
उड़ने लगे थे हम
आंख खुली तो देखा हमने
चारों तरफ अंधेरे थे ....
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे....

तू था तो लगता था कि
हम हर कर भी जीत गए
पर वह भूल थी हमारी
और कुछ समय के फेरे थे ....
मानने लगे थे सनम वह मेरे थे ....

हमेशा मेरी ख्वाहिशें
दम तोड़ती है तेरे दामन में
रूठ जाऊं और तू हमें मना ले ....
मैं रूठ जाऊं और तू मुझे मना ले ....
यह कारोबार तेरे थे ....
यह कारोबार तेरे थे .....
यह कारोबार तेरे थे ......

हम उनके इश्क के गुमान में कुछ ....इस कदर टेढ़े थे की मानने लगे थे सनम वह मेरे थे........
सनम वह मेरे थे.....
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