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चंचल मन

Garima Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चंद्रघटा की लहरों में मेरे मन का श्रृंगार हुआ,
        
                                                    
                            
बिंदिया, लाली, सूरमा, पाँजेब का भी अधिकार हुआ,
सजी धजी सी पालकी में जी जाकर विराजमान हुआ,
कभी छलक कर गगरी में देखता है,
कभी उचक कर बदरी में देखता है,
सवारी निकलने समय सब जगह हाहाकार हुआ,
अंदर पालकी में बैठा मन जाने कब फरार हुआ!

 
एक महीने पहले
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