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इश्क़ में तुम्हारे

Ganesh Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नजरें चुराता क्यों है मुझसे, मेरे हमनवाँ
        
                                                    
                            
रहता नहीं सदा है, जहाँ में कोई जवां

किस बात का गुमा है तुमको, ए मेरे हुज़ूर
जो आलमे बेफिक्री है, कुछ बात है जरूर

इश्क़ में तुम्हारे, मुझे चाहिए पनाह
आशिकी महबूब की, नहीं कोई गुनाह

आ भी जाओ, कि पल दो पल है जिंदगी
ताउम्र फिर रहेगी, सरकार-ए-बन्दगी
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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