नजरें चुराता क्यों है मुझसे, मेरे हमनवाँ
रहता नहीं सदा है, जहाँ में कोई जवां
किस बात का गुमा है तुमको, ए मेरे हुज़ूर
जो आलमे बेफिक्री है, कुछ बात है जरूर
इश्क़ में तुम्हारे, मुझे चाहिए पनाह
आशिकी महबूब की, नहीं कोई गुनाह
आ भी जाओ, कि पल दो पल है जिंदगी
ताउम्र फिर रहेगी, सरकार-ए-बन्दगी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X