विज्ञापन

बचाए रखा

fun entertainment

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी को खेल और खिलौनों से सजाए रखा,
        
                                                    
                            
हमने थोड़ा अपने बचपन को बचाए रखा।
बागी डाकुओं और नेताओं की कहानी में,
जाने क्यों हमने डाकुओं को बचाए रखा।
खेल शतरंज हो और बाज़ी भले शह मात की हो,
हमने कैसे भी करके प्यादों को बचाए रखा।
बिक रहे अलग अलग भावो में यहां जिस्म,
फिर भी हमनें खुदको फिसलने से बचाए रखा।
एक बिल्ली काटे रस्ता और बाईं आंख फड़के,
रोज बस इतनी बदनसीबी को बचाए रखा।
दुःख मेरे अलग अलग सांचो में ढाले हुए,
उनमें मैने सिर्फ तेरे दुःख को बचाएं रखा।
- हेमन्त

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12570 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile