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इश्क़ में अजीब सा बवाल चल रहा है

Fanindra Dev

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ में अजीब सा बवाल चल रहा है
        
                                                    
                            
तुम मेरे हो की नहीं अभी भी ये सवाल चल रहा है
मंदी है इश्क़ में हमदर्दिओं की मगर
जालसाझियों का इसमें उछाल चल रहा है
कर रहा है ये दिल यकीन हर किसी पर
सो इसका ये हाल चल रहा है
मैं हूँ जो रिश्तों में वफ़ाएँ ढूंड रहा हूँ
इक वो है जो हर बार चाल चल रहा है
वहम में हूँ मैं की उसके
ज़हन में मेरा ख्याल चल रहा है
जिसके जिक्र कोई और फ़िलहाल चल रहा है
इक मैं हूँ जो उलझा हुआ हूँ
हर लम्हा मेरा बेहाल चल रहा है
उसके मिजाज से मालूम हुआ
दिन उसका बकमाल चल रहा है
मैं हूँ जो खुशियाँ लुटाए बैठा हूँ
वो खुशियों से मालामाल चल रहा है
एक महीने पहले
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