इश्क़ में अजीब सा बवाल चल रहा है
तुम मेरे हो की नहीं अभी भी ये सवाल चल रहा है
मंदी है इश्क़ में हमदर्दिओं की मगर
जालसाझियों का इसमें उछाल चल रहा है
कर रहा है ये दिल यकीन हर किसी पर
सो इसका ये हाल चल रहा है
मैं हूँ जो रिश्तों में वफ़ाएँ ढूंड रहा हूँ
इक वो है जो हर बार चाल चल रहा है
वहम में हूँ मैं की उसके
ज़हन में मेरा ख्याल चल रहा है
जिसके जिक्र कोई और फ़िलहाल चल रहा है
इक मैं हूँ जो उलझा हुआ हूँ
हर लम्हा मेरा बेहाल चल रहा है
उसके मिजाज से मालूम हुआ
दिन उसका बकमाल चल रहा है
मैं हूँ जो खुशियाँ लुटाए बैठा हूँ
वो खुशियों से मालामाल चल रहा है
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