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मेरी उलझन

Ektarajesh Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने को शब्दों में बयां नहीं कर सकती,
        
                                                    
                            
मैं वो धूप हूं जो तपिश सहन नहीं कर सकती,
बारिश में खिजान सी लगती हूं,
और मौसम-ए-सरमा तक बेज़ार हो जाती हूँ।
क्या कहूं अपने बारे में ए जिन्दगी,
अब अल्फाजों ने भी रूख बदल लिया है।
2 महीने पहले
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