अपने को शब्दों में बयां नहीं कर सकती,
मैं वो धूप हूं जो तपिश सहन नहीं कर सकती,
बारिश में खिजान सी लगती हूं,
और मौसम-ए-सरमा तक बेज़ार हो जाती हूँ।
क्या कहूं अपने बारे में ए जिन्दगी,
अब अल्फाजों ने भी रूख बदल लिया है।