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मेरी उलझन

                
                                                         
                            अपने को शब्दों में बयां नहीं कर सकती,
                                                                 
                            
मैं वो धूप हूं जो तपिश सहन नहीं कर सकती,
बारिश में खिजान सी लगती हूं,
और मौसम-ए-सरमा तक बेज़ार हो जाती हूँ।
क्या कहूं अपने बारे में ए जिन्दगी,
अब अल्फाजों ने भी रूख बदल लिया है।
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2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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