विज्ञापन

वक़्त बदलते देखा है

EKTA DIXIT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो कभी दूर था, उसे बहुत पास से देखा है,
        
                                                    
                            
मैंने वक्त को इतने ऐतबार से बदलते देखा है।

बदल गई हैं राहें, बदल गया है ज़माना,
क्योंकि अब सबको है सिर्फ पैसा कमाना।

दौड़ रहे हैं सब यहाँ एक अनजानी सी रेस में,
इंसान घूम रहा है अब इंसानियत के भेष में।

भूल गए हैं कि कफ़न के साथ नहीं जाता कोई खज़ाना,
फिर भी जुटे हैं सब सजाने में अपना आशियाना।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile