तेरे पास से गुज़रें पढ़ लेना।।
तेरी याद लिखी है सीने मे,
जो फुर्सत हो तो पढ़ लेना।।
कुछ लफ़्ज़ लिखे.....
मेरी याद बसी तेरे ख्वाबो में,
जो देख सको तो सो लेना।
प्यार हमारा खुला ग्रन्थ है,
दिल जब चाहे पढ़ लेना।।
कुछ लफ़्ज़ लिखे.....
हम बिछुड़ गए एक दूजे से,
तुम भूल गए मुझे याद रहा।
कभी याद हमारी आए सनम,
तो ये गीत हमारे पढ़ लेना।।
कुछ लफ़्ज़ लिखे....
मिलकर भी हम मिल ना सके,
कभी वक्त मिले तो मिल लेना।
ये गीत लिखे अश्को में डूबा,
होठों से लगा कर पढ़ लेना।।
कुछ लफ़्ज़ लिखे......
- डॉ शिवदत्त शर्मा 'शिव'
जयपुर ग्रेटर राजस्थान