विज्ञापन

माँ शारदे

DrNeelu Sameer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पुस्तक की करती मैं पूजा तेरे सिवा नहीं है दूजा
        
                                                    
                            
कोई मेरा तारणहार न माता तू ही सुने पुकार
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार 

माता मेरे सब दुःख हरती मेरे उर संगीत तू भरती
बाल्यकाल से करती आई मां तेरी जय जयकार
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार 

वीणा के तार असाध्य हुए जब मंद हुई मेरी मेधा
तब तब तूने मुझे संभाला किया नित्य उपकार
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार 

सदैव रही मैं तव उपासिका बनी सदा मैं तेरी साधक
सुबह करूं मैं तेरा वंदन संध्या हो तेरा सत्कार
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार 

मां शारदे मां सरस्वती शोभा दे तुझको कमलासन
मां शारदे मेरी भूलों का कर तत्काल निवार
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार 
मुझ अज्ञानी मंदमति का तू ही ज्ञानाधार ।।

-डॉ नीलू शुक्ला समीर
 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all