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सहसा मुझे देख चमक उठती हैं

Dr.charumitra nr

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई महीनों से
        
                                                    
                            
बिस्तर पर बीमार
माँ की
पथराई नम आँखें
सहसा मुझे देख चमक उठती हैं
मुझे लगता है मुझे पहचान रही हैं!
मैं बेतहाशा चूमती हूँ उसे,
तो बच्चों जैसी मासूम मुस्कान
खिल पड़ती है
उसके निष्कपट चेहरे पर
ज्यों किसी अंजान को
रास्ते पर मिल जाने पर
होती है हमारे चेहरे पर
अजनबियत वाली
फिर भी
जानी- पहचानी
बेमतलब की मुस्कान
जो रात की अकेलाई में
रूला देती है मुझे ...
उसके
ख़ामोश- कंपकंपाते होंठ
डबडबाई आँखें
मानो
ख़ामोशी से कह रही हों

मुझे जीने दो....
या
मुझे जाने दो.......???
 
2 महीने पहले
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