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सामयिक ग़ज़ल

Dr Manoj Abodh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या तबाही ये कर गया पानी
        
                                                    
                            
पूरी बस्ती में भर गया पानी

पुल सड़क घर दुकान क़स्बा तक
नेस्त-नाबूद कर गया पानी

मौत का ख़ौफ़नाक मंज़र था
जिस तरफ़ से गुज़र गया पानी

कितने परिवार बाल बच्चों की
ज़िंदगी लील कर गया पानी

उनसे उम्मीद क्या करे कोई
जिनकी आँखों का मर गया पानी

बाँध नदियों पे वे बनाते रहे
सर के ऊपर उतर गया पानी

कितनी आँखों में हादसा बनकर
उम्र भर को ठहर गया पानी
- मनोज अबोध
एक महीने पहले
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