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मेरे प्रियतम

Dr. Mamta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मोहक मोहन मनभावन मंजुल,
        
                                                    
                            
मेरे हियवर मेरे प्रियवर,
हिय में हरपल हरक्षण तुम,
जीवन तुम ही हो हृदयेश्वर।।

तुमसे ही श्रृंगार मेरा,
मुस्कान तुम्हारी है उपहार मेरा,
सरिता सम मैं सिंधु हो तुम,
संगम तुममें ही प्राणेश्वर ।।

निर्मल निश्छल छवि जो देखूँ,
स्नेह का अर्णव चित्त मेरे,
विमल इंदु सम शीतल चितवन,
हर ले हिय संताप मेरे।।

विनती शशि शेखर के चरणों में,
चिरायु रहें जीवन धन मेरे,
प्रेम–पुहुप बगिया में क्षण–क्षण,
प्रणय सुगंधि प्रसार मेरे।।
-ममता “विमल” अवस्थी
एक वर्ष पहले
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