मैं ममता !! मेरा नाम ही मेरा उद्देश्य
टूटी दीवारों को उम्मीदों के रंग भरना ही मेरा लक्ष्य
कभी मां, कभी अर्धांगिनी
कभी बेटी तो कभी बहन
कभी शिक्षक तो कभी पाठक
कभी वक्ता और कभी श्रोता
न जाने कितने रूप में जीती रही अब तक
किसी का सहारा तो किसी की हिम्मत
काग़ज़, कलम और करुणा
इन तीनों से मैंने ज़िंदगी की कहानी लिखी।
डिग्रियाँ भी आईं, पर असली ज्ञान तो
हर उस आंसू से मिला जिसे मैंने चुपचाप पोंछा।
हर बीता वक्त और उसकी कहानी
मेरे दिल में एक कविता बनकर बस गई।
कभी बच्चों के मासूम सवाल और कभी टूटे रिश्तों की चुप्पी मुझे जीवन का अर्थ समझा गई।
मैं खुद अपनों से ही धोखा खा गई
अपनी कक्षा से काउंसलिंग रूम तक,
मैंने रिश्तों को, मन को, समय को, पढ़ा है।
जिंदगी की डायरी में कुछ पन्ने भले ही खाली रह गए हो
पर नित निज संघर्षों से अपना अध्याय रचा है
मैंने अपनी पहचान बनाई
टूटती उम्मीदों में हौसला बनकर
हर सपने को बार बार बुनकर
ख़ामोशियों में आवाज़ बनकर,
अंधेरों में रास्ता बनकर,
और हर ‘मैं नहीं कर सकती’ को
‘हाँ, मैं कर सकती हूँ’ में बदलकर।
मैं ममता हूँ !!
सिर्फ एक नाम नहीं, एक संकल्प हूँ।
आशा हूं प्रतिज्ञा हूं
हे ईश्वर इतनी विनती सुन लेना
मेरा ज्ञान किसी के जीवन को दिशा दे।
बस इतना संभाल लेना.....