देशभक्ति-जनसेवा के,करते खूब दिखावे
झूठे हैं मेरे नेता,जूठे उनके वादे
वीरों की इस भूमि का,भरत से भारत नाम पड़ा
बुद्ध, महावीर और गाँधी से,दुनिया में सम्मान बढ़ा
प्रताप, शिवाजी, गुरु गोविंद ने,वीरता का परचम लहराया
भगत सिंह की शहादत ने देशभक्ति का मतलब सिखाया
देश की खातिर मरने वाले,आज वो नेता नहीं रहे
भारत माँ के आँसू बह रहे,दर्द की पीड़ा सह रहे
शहीदों ने बलिदान देकर,अंग्रेजों से देश छुड़ाया,
उसी देश को नेताओं ने,पूंजीपतियों का गुलाम बनाया
कभी कहा ग़रीबी हटेगी,कभी कहा महंगाई घटेगी
कभी कहा अच्छे दिन आएंगे,कभी कहा दुश्मन के सिर लाएंगे
इनके वादों पर अक्सर,जनता ने विश्वास किया
अपने हाथों से ही अपना,भविष्य का सत्यानाश किया
देश की जनता मरती रही,महामारी से लड़ती रही
शहर दर शहर लाशों के मंजर,दिल में चुभ रहे थे खंजर
महामारी से था जब हाहाकार,हर तरफ थी चीख़ पुकार
जनता मौत से जूझ रही थी,इनको राजनीति सूझ रही थी
इनके अल्प ज्ञान से,दुनियाँ में भारत शर्मिंदा हैं
धर्म-जाति के नाम पर,राजनीति इनकी ज़िंदा हैं
रोज़गार किसी को दिए नहीं,काला धन अब और बढ़ा हैं
रगों में इनके ख़ून नहीं हैं,भ्रष्टाचार नस-नस में भरा हैं
देश के अंदर यह बहुत गुर्राते,जनता पर ही जोर आजमाते
शेरों सी वीर हैं हमारी सेना,पर नेता चीन से ख़ौफ़ हैं खाते
कुर्सियों की इस जंग में,इमान नीलाम हो रहा
सच्चाई को सूली टांगकर,झूठ का सलाम हो रहा
बांट रहे हैं नफ़रत का ज़हर,अखबारों की सुर्खियों में
रोटी-कपड़ा-मकान जल गया,इनकी चुनावी भट्टियों में
जो संसद में बैठकर,देश को बेचकर खाते हैं
वही आज सड़क पर आकर,हमें देशभक्ति सिखाते हैं
नेता शब्द महान हैं,भारत का सम्मान हैं
वीर सुभाष से जुड़ा हुआ,देश का अभिमान हैं
नेता हमारे यदि सच्चे होते,देश के हालात अच्छे होते
विश्वगुरु बनकर दिशा दिखाते,शान से तिरंगा लहराते