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अमर बलिदानी शहीद भगत सिंह

Dr Mahesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भगत सिंह ओ अमर बलिदानी
        
                                                    
                            
नमन करे हम सब हिंदुस्तानी

वतन की ख़ातिर कैसे जीना,तुमने हमें सिखाया हैं
वतन पर हँसकर कैसे मरना,यह पावन पाठ पढ़ाया हैं

जब गोरों का दमन-चक्र था,चीख रही थी भारत-माटी
जलियाँवाले बाग में बरसी थी गोलियों और खूनी लाठी।


जुल्मों की उस ज्वाला को,तुमने निज उर में धारा था
हाथों में ले क्रांति-पताका,गोरों की सत्ता को ललकारा था

उफनती उम्र, नया जोश था,सुंदर सपने, घर-बार भी थे
मातृभूमि की बलिवेदी पर,त्याग दिए जो प्राण-धार भी थे

बनाकर दुल्हन आज़ादी को,सर्वस्व न्योछावर कर डाला
असेंबली में गूँजा धमाका,बधिर कानों में भूचाल ला डाला

आज़ादी के गाकर तराने,हँसते-हँसते शहीद हो गये
इंकलाब का लगाकर नारा,सदा के लिए अमर ही गये

रंग दे बसंती' की तान पर,गर्व से तुम सीना तान गए
भारत माँ का वो दुलारा सितारा,फाँसी का फंदा चूम गए

हमें नाज़ है तेरी शहादत पर,संकट में जो कभी टूटे नहीं
माफ़ीनामा फाड़कर फेंका,प्राणों की ख़ातिर कभी झुके नहीं

तुम्हें नमन वीर भगत सिंह,तुम भारत का स्वाभिमान हो
अमर-अजर इस राष्ट्र-गगन के,तुम अभिमान हो।

तुम्हारी फाँसी की वो रस्सियाँ,,इंकलाब का पैगाम बनीं
दी तुमने जो आहुति स्वदेश हित,युगों-युगों का स्वाभिमान बनीं

तुमसा सच्चा बेटा पाकर,धन्य हो गई भारत मात
अमर रहेगी तेरी शहादत,अमर रहेगी तेरी गाथा !

 
एक घंटा पहले
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