विज्ञापन

यूँ ही उदास है दिल बेक़रार थोड़ी है

Dr. Jatinder

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यूँ ही उदास है दिल बेक़रार थोड़ी है
        
                                                    
                            
मुझे किसी का कोई इंतिज़ार थोड़ी है

नज़र मिला के भी तुम से गिला करूँ कैसे
तुम्हारे दिल पे मेरा इख़्तियार थोड़ी है

मुझे भी नींद न आए उसे भी चैन न हो
हमारे बीच भला इतना प्यार थोड़ी है

मुहब्बतों में सभी हक़ अदा किए हमने
हमारे सर पे किसी का उधार थोड़ी है

ख़िज़ाँ ही ढूँढती रहती है दर-ब-दर मुझ को
मेरी तलाश में पागल बहार थोड़ी है

न जाने कौन यहाँ साँप बन के डस जाए
यहाँ किसी का कोई एतिबार थोड़ी है

समझ सकोगे न 'परवाज़' तुम मुहब्बत को
ये आशिकी है कोई कारोबार थोड़ी है
-जतिन्दर परवाज़
 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all